तांत्रिक का श्राप

तांत्रिक का श्राप

गाँव सिवालक खास, पहाड़ों की तलहटी में बसा एक शांत गाँव था। यह गाँव अपनी सुंदरता और हरियाली के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन एक रहस्यमयी कहानी ने इसे लोगों के बीच बदनाम कर दिया। गाँव के किनारे पर, एक पुराना और वीरान मंदिर था, जहाँ कोई भी जाने की हिम्मत नहीं करता था। कहते थे कि कई साल पहले वहाँ एक शक्तिशाली तांत्रिक रहा करता था, जो अपनी काली विद्या से पूरे गाँव को डरा कर रखता था। गाँव के लोग उससे खौफ खाते थे, पर एक दिन जब उसकी क्रूरता हद से बढ़ गई, गाँववालों ने उसे मार डाला। मरने से पहले उसने गाँव पर भयंकर श्राप दिया, "जिसने मुझे मारा, उसकी पीढ़ियों को इसकी सज़ा भुगतनी पड़ेगी। मेरी आत्मा यहाँ हमेशा रहेगी और हर रात एक बलि की मांग करेगी।"

समय बीत गया, लेकिन तांत्रिक का श्राप गाँव पर मंडराता रहा। कई लोग मंदिर में जाकर वापस नहीं लौटे। गाँववालों ने वहाँ जाने पर प्रतिबंध लगा दिया और उस मंदिर के पास जाना पाप माना जाने लगा। परन्तु, हर रहस्य का एक जिज्ञासु होता है।

रवि, एक युवा लड़का जो हाल ही में गाँव आया था, इस मंदिर की कहानियों को सुनकर प्रभावित हुआ। वह हमेशा सत्य जानने की लालसा रखता था। उसने अपने दोस्तों को मंदिर चलने के लिए मनाया, पर सबने मना कर दिया। रवि ने ठान लिया कि वह अकेला ही मंदिर जाएगा और तांत्रिक की कहानी का सच पता लगाएगा।

एक रात, जब गाँव सो रहा था, रवि ने चुपके से मंदिर का रुख किया। जैसे ही वह मंदिर के करीब पहुँचा, हवा अचानक से तेज़ हो गई, पेड़ झूमने लगे और चारों ओर भयानक सन्नाटा पसर गया। मंदिर का दरवाज़ा जंग लगा हुआ था, परंतु रवि ने हिम्मत करके उसे धक्का दिया। दरवाज़ा खुलते ही एक ठंडी लहर उसके चेहरे से टकराई, मानो कोई अदृश्य शक्ति उसका स्वागत कर रही हो। मंदिर के भीतर घना अंधकार था, पर दीवारों पर तांत्रिक के यज्ञ की चिह्न दिखाई देने लगे। दीवारों पर खून से बने अजीब से चिह्न और तांत्रिक के मंत्रों की प्रतिध्वनि रवि को भीतर तक झकझोरने लगी।

रवि ने मंदिर के बीचों-बीच एक बड़ा हवन कुंड देखा, जिसमें अब भी राख मौजूद थी। अचानक उसे लगा जैसे उसकी पीठ पर किसी की नजरें हैं। वह मुड़ा, लेकिन वहाँ कोई नहीं था। तभी उसे एक धीमी हंसी सुनाई दी—वह हंसी तांत्रिक की थी। रवि का दिल तेजी से धड़कने लगा, और तभी एक तेज़ आवाज़ गूंजी, "क्यों आए हो यहाँ? मेरा श्राप तुम्हें भी खत्म कर देगा।"

रवि डर गया लेकिन उसने हिम्मत दिखाते हुए पूछा, "तुम कौन हो और यह श्राप क्यों दिया?" तभी तांत्रिक की आत्मा का धुंधला सा रूप दिखाई दिया। वह हवा में तैरता हुआ रवि के पास आया और बोला, "मैं तांत्रिक हूँ, जिसे इस गाँव ने मारा था। मैं तब तक चैन से नहीं रहूँगा, जब तक इस गाँव की हर पीढ़ी को खत्म न कर दूँ।"

रवि ने महसूस किया कि इस श्राप को कोई भी तोड़ नहीं सका क्योंकि लोगों ने सच्चाई को जानने की कोशिश ही नहीं की। लेकिन अचानक, मंदिर में हलचल होने लगी, जमीन हिलने लगी, और ऐसा लगा जैसे मंदिर ध्वस्त होने वाला है।

रवि ने मंदिर से बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन दरवाजे बंद हो गए। तांत्रिक की आत्मा हँस रही थी, "अब तुम्हारा अंत नज़दीक है।" तभी रवि को तांत्रिक के हवन कुंड के पास रखी एक पुरानी माला दिखाई दी, जिसके बारे में उसने सुना था कि वह तांत्रिक की शक्ति को नियंत्रित कर सकती है। उसने तुरंत माला उठाई और तांत्रिक के सामने लहराई। माला के चमकते ही तांत्रिक की आत्मा चीख उठी और एक भयानक विस्फोट हुआ।

अचानक सब शांत हो गया। रवि ने खुद को मंदिर के बाहर पाया, और मंदिर की दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो गए। गाँव पर तांत्रिक का श्राप टूट चुका था। लेकिन रवि जानता था कि उस रात उसने जो देखा और महसूस किया, वह हमेशा उसकी यादों में बना रहेगा।

गाँववालों ने जब यह सुना, तो उन्होंने मंदिर के पास कोई नई गलती न करने की कसम खाई। रवि गाँव का हीरो बन गया, पर उसने तांत्रिक के श्राप से सदा के लिए डरना सीख लिया।

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