काला रात्रि की छाया गाँव हसपुरा, एक छोटा और शांतिपूर्ण गाँव था, जो अपनी सामान्य दिनचर्या में व्यस्त रहता था। लोग खेतों में काम करते, बच्चों की हंसी गाँव की गलियों में गूंजती, और शाम को चाय की दुकान पर गाँव के बुजुर्ग किस्से-कहानियाँ सुनाते। लेकिन जब काली रात आती, तो सारा गाँव चुप्पी में डूब जाता। लोग कहते थे कि उस रात एक रहस्यमयी छाया गाँव में घूमती है, जो जिसने भी देखी, उसकी मौत निश्चित है। इस घटना का नाम ही पड़ गया था "काला रात्रि की छाया।" शुरू में लोगों ने इसे अंधविश्वास माना, लेकिन धीरे-धीरे जब गाँव में अजीब घटनाएं होने लगीं, तो डर बढ़ने लगा। कुछ लोगों का कहना था कि उन्होंने एक काली परछाई को अपने घरों के पास देखा है। यह छाया धीरे-धीरे गाँव में अपने पैर पसार रही थी, और जो भी इसे देखने की कोशिश करता, उसकी हालत बिगड़ जाती। रवि, एक जिज्ञासु युवक, इन बातों पर यकीन नहीं करता था। वह साहसी था और इन घटनाओं की तह तक जाना चाहता था। उसके दोस्तों और परिवार ने उसे मना किया, लेकिन उसने ठान लिया कि वह काली रात में उस छाया का सामना करेगा। उस रात, गाँव में सन्नाटा था। हवाएँ तेज़ हो रही थ...
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