तांत्रिक का श्राप गाँव सिवालक खास, पहाड़ों की तलहटी में बसा एक शांत गाँव था। यह गाँव अपनी सुंदरता और हरियाली के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन एक रहस्यमयी कहानी ने इसे लोगों के बीच बदनाम कर दिया। गाँव के किनारे पर, एक पुराना और वीरान मंदिर था, जहाँ कोई भी जाने की हिम्मत नहीं करता था। कहते थे कि कई साल पहले वहाँ एक शक्तिशाली तांत्रिक रहा करता था, जो अपनी काली विद्या से पूरे गाँव को डरा कर रखता था। गाँव के लोग उससे खौफ खाते थे, पर एक दिन जब उसकी क्रूरता हद से बढ़ गई, गाँववालों ने उसे मार डाला। मरने से पहले उसने गाँव पर भयंकर श्राप दिया, "जिसने मुझे मारा, उसकी पीढ़ियों को इसकी सज़ा भुगतनी पड़ेगी। मेरी आत्मा यहाँ हमेशा रहेगी और हर रात एक बलि की मांग करेगी।" समय बीत गया, लेकिन तांत्रिक का श्राप गाँव पर मंडराता रहा। कई लोग मंदिर में जाकर वापस नहीं लौटे। गाँववालों ने वहाँ जाने पर प्रतिबंध लगा दिया और उस मंदिर के पास जाना पाप माना जाने लगा। परन्तु, हर रहस्य का एक जिज्ञासु होता है। रवि, एक युवा लड़का जो हाल ही में गाँव आया था, इस मंदिर की कहानियों को सुनकर प्रभावित हुआ। वह हमेशा सत्य जानने क...
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